पत्र व्यवहार का पता

अभिव्यक्ति तुक-कोश

१. ६. २०१७

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गीतों में बहना

 

 

कभी कभी, अच्छा लगता है
कुछ तनहा रहना

तन्हाई में भीतर का
सन्नाटा भी बोले
कथ्य वही जो बंद ह्रदय के
दरवाजे खोले

अनुभूति के, अतल जलधि को
शब्द - शब्द कहना
कभी कभी, अच्छा लगता है
कुछ तनहा रहना

बंद पलक में अहसासों के
रंग बहुत बिखरे
शीशे जैसा शिल्प तराशा
बिम्ब तभी निखरे

प्रबल वेग से भाव उड़ें जब
गीतों में बहना
कभी कभी, अच्छा लगता है
कुछ तनहा रहना

गहन विचारों में आती, जब
भी कठिन हताशा
मन मंदिर में दिया जलाती
पथ की परिभाषा

तन -मन को रोमांचित करती
सुधियों को गहना
कभी कभी, अच्छा लगता है
कुछ तनहा रहना

- शशि पुरवार

इस माह

गीतों में-

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शशि पुरवार

अंजुमन में-

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गुलाब जैन

छंदमुक्त में-

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परमेश्वर फुँकवाल

मुक्तक में-

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ऋषभदेव शर्मा

पुनर्पाठ में-

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अश्विनिकुमार विष्णु

पिछले माह
१ मई २०१७ को प्रकाशित
अंक में

गीतों में-

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कृष्ण बक्षी

अंजुमन में-

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वीरेन्द्र अकेला

छंदमुक्त में-

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विमलेश त्रिपाठी

दोहों में-

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टीकमचंद ढोडरिया

पुनर्पाठ में-

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सुमित्रानंदन पंत

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संपादन¸ कलाशिल्प एवं परिवर्धन : पूर्णिमा वर्मन

सहयोग :
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