अंजुमनउपहार कविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम
गौरवग्रंथ दोहेरचनाएँ भेजेंनई हवा पाठकनामा पुराने अंकसंकलन
हाइकु हास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतरसमस्यापूर्ति

 

अनुभूति में शशि जोशी की रचनाएँ 

अंजुमन में--
पहचान तलाशें
बँटवारे की पीड़ा
मुझे टूटन
सबको अपनी रहे ख़बर

कविताओं में-
चाहता मन

 

चाहता मन

अच्छा नहीं लगता
यूँ ही तुम्हारा हँसते हँसते
उदास हो जाना
चाहता मन
एक लक्ष्मण रेखा खींच दूँ
तुम्हारी हँसी के चारों ओर
जहाँ से
की उदासी
कोई पीड़ा
प्रवेश न कर सके।
लेकिन क्या करूँ
सामर्थ्य नहीं इतनी हाथों में
न तप का तेज है

मेरा मन
उस पंख कटे पंछी सा
जो कल्पना में उड़ानें भरता
कुछ नहीं कर सकता
बस चाहता मन
तुम रहो मुस्कुराते
अच्छा नहीं लगता इसे
यों ही तुम्हारा हँसते हँसते
उदास हो जाना।
  

 

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँ दिशांतरसमस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।

website metrics