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सपना मांगलिक

जन्म- १७ फरवरी १९८१ को भरतपुर में।
शिक्षा- एम.ए. बी.एड., डिप्लोमा एक्सपोर्ट मैनेजमेंट

कार्यक्षेत्र-
लेखन एवं संपादन। जीवन सारांश समाज सेवा समिति तथा शब्द सारांश (साहित्य एवं पत्रकारिता को समर्पित संस्था) की संस्थापिका। अनेक साहित्यिक सांस्कृतिक संस्थाओं की सदस्य।

प्रकाशित कृतियाँ-
कहानी संग्रह- पापा कब आओगे, नौकी बहू
प्रेरक-लेख संग्रह- सफलता रास्तों से मंजिल तक, ढाई आखर प्रेम का
कविता संग्रह- कमसिन बाला, कल क्या होगा, बगावत
गजल संग्रह- जज्बा-ए-दिल (तीन भागों में)
बाल साहित्य- टिमटिम तारे, गुनगुनाते अक्षर, होटल जंगल ट्रीट
संपादन– तुम को ना भूल पायेंगे (संस्मरण संग्रह) स्वर्ण जयंती स्मारिका (समानांतर साहित्य संस्थान), बातें अनकही (कहानी संग्रह ) इसके अतिरिक्त आकाशवाणी एवं दूरदर्शन पर निरंतर रचनाओं का प्रकाशन।

सम्मान-
विभिन्न राजकीय एवं प्रादेशिक मंचों से सम्मानित

सम्प्रति–
उपसम्पदिका-आगमन साहित्य पत्रिका, स्वतंत्र लेखन, मंचीय कविता, तथा सार्वजनिक मीडिया पर सक्रिय।

email-sapna8manglik@gmail.com

 

सपना मांगलिक के दोहे

ढोंग अनोखे रच रहे, जग के ठेकेदार
घूमें जोगी भेष में, अंटी में कलदार

दिल में कारगुजारियाँ, अधरों पर है मौन
ऐसे बगुला भगत को, पहचानेगा कौन?

सदकर्मों का तोड़ घट, जो जन पाप कमाय
उसको लाभ मिले नहीं और गाँठ लुट जाय

नितदिन बढ़ता जा रहा, जातिवाद का कोढ़
कितने हिस्सों में बंटें, मची हर तरफ होड़

नफरत डारो आँच में, दिल लो आप मिलाय
प्रेम भाव मन में रखो, दो अलगाव मिटाय

करो लालफीता खतम, हो ईमान बहाल
पूरे जल्दी काज हों, देश बने खुशहाल

नित दिन बढती जा रही, रिश्तों बीच खटास
लड्डू भी त्यौहार के, घोल सकें न मिठास

उर में गहरा जख्म हो, दवा न दे आराम
प्रेम पगे दो बोल ही, करें दवा का काम

१५ फरवरी २०१६

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