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अनुभूति में अभिज्ञात की रचनाएँ

अंजुमन में -
आइना होता
तराशा उसने
दरमियाँ
रुक जाओ
वो रात
सँवारा होता
सिलसिला रखिए
पा नहीं सकते

कविताओं में -
अदृश्य दुभाषिया

आवारा हवाओं के खिलाफ़ चुपचाप
शब्द पहाड़ नहीं तोड़ते
तुमसे
हवाले गणितज्ञों के
होने सा होना

गीतो में -
मीरा हो पाती

प्रीत भरी हो
तपन न होती
उमर में डूब जाओ
लाज ना रहे
मन अजंता
अब नहीं हो
रिमझिम जैसी

संकलन में -
प्रेमगीत-
आख़िरी हिलोर तक
गुच्छे भर अमलतास-
धूप

 

वो रात

बातों बातों में जो ढली होगी
वो रात कितनी मनचली होगी

तेरे सिरहाने याद भी मेरी
रात भर शम्मां-सी जली होगी

जिससे निकला है आफ़ताब मेरा
वो तेरा घर तेरी गली होगी

दोस्तों को पता चला होगा
दुश्मनों-सी ही खलबली होगी

सबने तारीफ़ तेरी की होगी
मैं चुप रहा तो ये कमी होगी

तेरी आँखो में झाँकने के बाद
लड़खड़ाऊँ तो मयक़शी होगी

है तेरा ज़िक्र तो यकीं है मुझे
मेरे बारें में बात भी होगी

 

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।

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