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अनुभूति में अभिनव शुक्ला की कविताएँ -
गीतों में-
अंतिम मधुशाला (हरिवंशराय बच्चन को श्रद्धांजलि)

अपने दिल के हर आँसू को
आवाज़ें

नहीं बयान कर सके
बांसुरी
वक्त तो उड़ गया
शान ए अवध
है बड़ी ऊँची इमारत

ज़िन्दगी है यही

हास्य-व्यंग्य में -
इंटरव्यू
काम कैसे आएगी
गांधी खो गया है
जेब में कुछ नहीं है
मुट्टम मंत्र
विडंबना

संकलन में
ज्योति पर्व -वो काम दिवाली कर जाए
                खुशियों से भरपूर दिवाली
गाँव में अलाव - कैसी सर्दी
प्रेमगीत - भावों के धागों को
गुच्छे भर अमलतास
नया साल-अभिनव नववर्ष हो
ममतामयी-मेरा आदर्श

  विडंबना

हिन्दी के एक बड़े साहित्यकार नें,
नगर में आयोजित,
राष्ट्रभाषा विकास सम्मेलन में,
अध्यक्षता करने से मना कर दिया,
उनसे जब इस,
अस्वीकृति का कारण पूछा गया,
तो वे बोले,
हमारी भी अपनी कुछ मजबूरियाँ हैं,
यह अलग बात है कि,
शब्दों को,
भाषा की चाशनी में,
हम ठीक प्रकार से घोलते हैं,
परंतु आजकल फैशन के मुताबिक,
पब्लिक में,
सिर्फ़ अंग्रेज़ी ही बोलते हैं।

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