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अनुभूति में आचार्य सारथी की रचनाएँ

गीतों में—
एक टूटा स्वप्न
ज्योतिधन्वा गंध
गूँगी हलचल
दुख की कपास
धूप
ध्वजारोहण 

 

धूप

झाँक-झूँक खिड़की की
स्याह सलाख़ों से
कमरे को पोत रही
अलसाई धूप!

जागा था
चिड़ियों की चोंचों में दिन
सूरज को पाया था
तारे गिन-गिन
देख-देख आंगन से
उठते धुएँ को
अंधियारे घूँघट में
घबराई धूप!

भीगी थी सुर्ख-सुर्ख
बारिश से रात
सोची थी मौसम ने
फ़सलों की बात
खुशबू की फाँसों में
फूलों की चाह लिए
काँटों की बाँदी बन
पछताई धूप!

२४ फरवरी २००६

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