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अनुभूति में डॉ. अजय पाठक की रचनाएँ-

नए गीत
कुछ तेरे, कुछ मेरे
गाँव
सफलता खोज लूँगा

गीतों में
अनुबंध
कबिरा तेरी चादरिया
चारों धाम नहीं
चिरैया धीरे धीरे बोल
पुरुषार्थ
बादल का पानी
भोर तक
मौन हो गए
यामिनी गाती है

समर्पित शब्द की रोली
हम हैं बहता पानी बाबा

संकलन में
नव सुमंगल गीत गाएँ
महुए की डाली पर उतरा वसंत
बादल का पानी

 

हम है बहता पानी बाबा

मिलती जुलती बातें अपनी मसला एक रुहानी बाबा
तुम हो रमता जोगी - साधु हम हैं बहता पानी बाबा

कठिन तपस्या है यह जीवन, राग-विराग तपोवन है
तुम साधक हो हम साधन हैं, दुनिया आनी-जानी बाबा

तुमने दुनिया को ठुकराया, हमको दुनिया वालों ने
हम दोनों की राह जुदा है, लेकिन एक कहानी बाबा

धुनी रमाये तुम बैठे हो, हम जलते अंगारों पर
तप कर और निखर जाने की हम दोनों ने ठानी बाबा

हृदय मरुस्थल बना हुआ है, और नयन में पानी है,
मौन साधकर ही झेलेंगे, मौसम की मनमानी बाबा।

रिश्ते नातों के बंधन से मुक्त हुए तुम भी हम भी,
अनुभव की बातें हैं अपनी अधरों पर ज्यों लानी बाबा

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