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अनुभूति में अजित कुमार की रचनाएँ-

कविताओं में-
ऊसर
कविता जी
नीम बेहोशी में
शहर के बीच
सभी
समुद्र का जबड़ा

संकलन में-
धूप के पाँव- उमस में

  शहर के बीच

शहर के बीचोबीच
जो एक बड़ा-सा फ़व्वारा है
जिसके इर्द-गिर्द
खूबसूरत बाग़ीचा है
वहाँ-वहाँ बिछी हैं
आरामदेह बेंचें. . .

आराम भी करो
नज़ारा भी देखो-
संगीत की लय पर
आर्केस्ट्रा के संग
उछलती-कूदती रंगीन रोशनियाँ
शीतल जल की फुहारें. . .

इंद्रजाल में
सबके सब मुग्ध-मोहित से फँसे थे. . .

तभी सरपत के वन में
पिंडली तक लथ-पथ कीचड़ से
कास के फूल चुनता
एक नन्हा शैतान
खिलखिलाता नज़र आया।

9 सितंबर 2007

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