अंजुमनउपहार कविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम
गौरवग्रंथ दोहेरचनाएँ भेजेंनई हवा पाठकनामा पुराने अंकसंकलन
हाइकु हास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतरसमस्यापूर्ति

 


अनुभूति में अविनाश वाचस्पति की रचनाएँ-

नई रचनाएँ
सड़क पर भागमभाग
पगडंडी की धार
मौसम से परेशान सब
आवाज आवाज है

कविताओं में
आराम
गरमी का दवा
जीना
पलक
पानी रे पानी
मज़ा
मैं अगर लीडर बनूँ तो
शहर में हैं सभी अंधे
साथ तुम्हारा कितना प्यारा

 

 

शहर में हैं सभी अंधे

इस शहर में हैं सभी अंधे
हेराफेरी के चलते धंधे

टूट पड़े हैं किस पेड़ से
धन के लोभी आँख के अंधे

आँख के अंधे फिर भी चंगे
करवाते हैं रोज़ ही दंगे

मच रहा चहुँ ओर अँधेरा
नहीं होता यहाँ कभी सवेरा

गुंडों का जहाँ लगा है डेरा
पुलिस का भी है वहीं बसेरा

ईमाँ तो मिलता नहीं कहीं भी
बेईमानी के गड़े खज़ाने

इन्सां को न कोई पहचाने
सच्चाई की कद्र न जाने

मेहनत से हैं हुए बेगाने
काले धन के ये अफ़साने

ऐसे-ऐसे डाल दें फंदे
अंधों को दे दें हम कंधे

9 जुलाई 2007

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँ दिशांतरसमस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।