अंजुमनउपहार कविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम
गौरवग्रंथ दोहेरचनाएँ भेजेंनई हवा पाठकनामा पुराने अंकसंकलन
हाइकु हास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतरसमस्यापूर्ति

 

अनुभूति में डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र की रचनाएँ-

गीतों में-
ऋतुराज इक पल का
केवल यहाँ सरकार है
गंगोजमन
ज़िन्दगी
देख गोबरधन
निकला कितना दूर
पीटर्सबर्ग में पतझर
राजा के पोखर में
 

संकलन में-
गाँव में अलाव- जाड़े में पहाड़

  देख गोबरधन

देख गोबरधन वर्दी कुर्सी
कपडों का सम्मान
और ज़ोर से चिल्ला-
अपना भारत देश महान।

क्या है तेरे पास, कलम का
क्या है यहाँ वजूद?
काला अक्षर देख, सभी हैं
लेते आँखें मूँद

इससे अच्छा तबला, घुंघरू
खेलों का मैदान
जिनके आगे दाँत निपोरे
पद्मश्री श्रीमान।

निगल गया 'राबन' का चश्मा
गाँधी की ऐनक
अंधे बहरे ब्रह्मा से
क्या माँग रहा तू हक?

रजनी-सजनी की क़िताब लिख
मत कर यहाँ गुमान
कवि-मनीषी सिर्फ़ यहाँ
अफसर, मंत्री धनवान।

कंकरीट के घने जंगलों में
बरसेगी आग
जीना है तो ढूँढ़ पेड़ की
छाँह, यहाँ से भाग

नंगा नाच देख रघुकुल का
वाल्मीकि हैरान
असली से नकली है महँगा
जान, न बन अनजान।

9 दिसंबर 2007

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँ दिशांतरसमस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।