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अनुभूति में
देवेंद्र आर्य की रचनाएँ-
गीतों में-
चाँदनी की मुस्कराहट
तुम्हारे बिन
बात अब तो खत्म करिए
मन सूखे पौधे लगते हैं
अंजुमन में-
जीवन क्या है
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चाँदनी की
मुस्कराहट
चाँदनी की
मुस्कराहट भर नहीं है ज़िन्दगी
खेत में उगते पसीने की चलो बातें करें।
आदमी के सामने
दुख-दर्द का मेला लगा,
भूख मुद्दत से खड़ी है झोंपड़ी के द्वार पर।
पंख हैं, पर हौसलों में आ बसी मजबूरियाँ,
जीत कर भी सच बिचारा तो खड़ा है हार पर।
बादलों का स्वाति-वर्षण भर नहीं है ज़िन्दगी,
मरुस्थलों से नव सृजन की, भोर की बातें करें।
सामने फैला
समंदर कह रहा, कुछ तो करो,
इन किनारों तक बंधी है रोशनी की जुस्तजू।
नाव के हर छिद्र पर लिख दो किनारों की लगन,
लहर पर सौ बार लिख दो ज़िन्दगी की आरजू।
तपन सहकर साथ चलना भर नहीं है ज़िन्दगी,
खुद घरौंदों को सजाकर बचपनी बातें करें।
है अंधेरा, पर
अंधेरा ही यहां शाश्वत कहां,
हर शिखर पर रोशनी के उत्स का शृंगार है।
इन कँटीली झाड़ियों से पथ कहाँ अवरुद्ध अब,
हर कदम के साथ मेरे लक्ष्य का संसार है।
मंज़िलों की सोच करना भी नहीं है ज़िन्दगी,
आस के परचम उड़ा कर आज की बातें करें।
1 जुलाई 2007
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