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गीत गा
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गीत गा

अमावस की रात का क्या, गीत गा
कृश ठिठुरते गात का क्या, गीत गा

गीत से संभव नया जीवन मिले,
मृत्यु की औकात का क्या, गीत गा।

पाँव में बेड़ी, करों में हथकड़ी,
नयन की बरसात का क्या, गीत गा।

ज़िंदगी बस कुछ नहीं शतरंज है,
हो गई उस मात का क्या, गीत गा।

सुमन का झरना विटप का टूटना,
पके खिरते पात का क्या, गीत गा।

गीत का अमृत, भुवन भर को मिला,
क्लेश की सौग़ात का क्या, गीत गा।

१ मई २००६

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