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इसाक अश्क

हिंदी की तमाम महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होने वाले श्री अश्क हिंदी के प्रख्यात नवगीतकार हैं। 'फिर गुलाब चटके', 'काश, हम भी पेड़ होते', 'लहरों के सर्प दंश' उनके नवगीत संग्रह हैं। गीत संग्रह 'सूने पड़े सिवान' पर उन्हें मध्यप्रदेश शासन का पुरस्कार प्राप्त हो चुका है।

विगत २५ वर्षों से उनके द्वारा संपादित पत्रिका 'समांतर' को छत्तीसगढ़ राज्य की महत्वपूर्ण साहित्यिक संस्था 'सृजन-सम्मान' द्वारा अखिल भारतीय साहित्य महोत्सव में राज्य के गवर्नर महामहिम के एम. सेठ द्वारा वर्ष २००४-०५ का पद्मश्री मुकुटधर पांडेय सम्मान प्राप्त हुआ है।

अनुभूति में डॉ. इसाक 'अश्क' की रचनाएँ-

गीतों में-
ऋतु फगुनाई है
अलस्सुबह
कंठ का कोहनूर

चुनावी शोर
दिन सुगंधों के
फाल्गुन गाती हुई
धूप दिन
बौर आए

सपनों के घोड़े

 

 

 

 

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