|
अनुभूति में
जयप्रकाश मानस की रचनाएँ—
नई कविताएँ
अंधा कुआँ
आकाश की आत्मकथा
चौपाल
पुरखे
कविताओं में—
अभिसार
नदी
पाँच छोटी कविताएँ
प्रायश्चित
बचे रहेंगे सबसे
अच्छे
वज़न
क्षणिकाओं में—
छाँव निवासी
बाज़ार
पहाड़
पाठ
|
|
अभिसार
आना होगा जब उसे
आना होगा जब
रोक नहीं सकती
भूखी शेरनी-सी दहाड़ती नदी
उलझा नहीं सकते
जादुई और तिलिस्मी जंगल
झुका नहीं सकते
रसातल को छूती खाई
आकाश को ऊपर उठाते पहाड़
पथभ्रष्ट देवताओं के मायावी कूट
अकारण बुनी गई वर्जनाएँ
समुद्री मछुआरों की जाल-सी
दसों दिशाओं को घेरती प्रलयंकारी लपटें
अभिसार के रास्ते में
नतमस्तक खड़ा हो जाता है सृष्टि-संचालक
स्वयं पुष्पांजलि लिए
आना होगा जब-जब उसे
वह आएगा ही
1 अप्रैल 2006
|