अंजुमनउपहार कविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम
गौरवग्रंथ दोहेरचनाएँ भेजेंनई हवा पाठकनामा पुराने अंकसंकलन
हाइकु हास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतरसमस्यापूर्ति

 


अनुभूति में जयप्रकाश मानस की रचनाएँ

नई कविताएँ
अंधा कुआँ
आकाश की आत्मकथा

चौपाल
पुरखे

कविताओं में
अभिसार
नदी
पाँच छोटी कविताएँ
प्रायश्चित
बचे रहेंगे सबसे अच्छे
वज़न

क्षणिकाओं में
छाँव निवासी
बाज़ार

पहाड़

पाठ

 

बचे रहेगें सबसे अच्छे

अच्छे मनुष्य बचे रहेंगे
उनके हिस्से की दुनिया से
चले जाने के बाद भी
लोककथाओं की असमाप्त दुनिया के
राजकुमार की तरह

बहुत अच्छे मनुष्य बचे रहेंगे
उनके हिस्से की दुनिया से
चले जाने के बाद भी
हवा-आग-पानी की तरह
अपनी दुनिया के आसपास की दुनिया में

सबसे अच्छे मनुष्य बचे रहेंगे
उनके हिस्से की दुनिया से
चले जाने के बाद भी
खुशबू की तरह
समूची दुनिया को छतनार
करते हुए गुलाब की तरह
खुशबू जी आग-हवा-पानी है

1 अप्रैल 2006

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँ दिशांतरसमस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।