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अनुभूति में ज्योत्स्ना मिलन की रचनाएँ

कविताओं में
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औरत
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कल
चार छोटी कविताएँ- भीतर तक, पीछे, होने का शब्द, सह्याद्रि के पहाड़ों में
तितली का मन
दरवाज़ा
पीठ
रात
लगातार
 

 

अवाक

अपने ठूँठ में
कोंपलें फूटने के अनुभव को
कहने की
लगातार कोशिश करती रही है
वह
कहते-कहते
हर बार,
कोंपलें फूटने लगतीं
और
अवाक
ताकते रह जाते
शब्द

१४ जनवरी २००८

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