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अनुभूति में
रामेश्वर कांबोज
हिमांशु
की रचनाएँ--
नई रचनाएँ—
इस शहर में
इस सभा में
गाँव अपना
तुम बोना काँटे
दिन डूबा
हास्य व्यंग्य
में—
कर्मठ गधा
कविजी पकड़े गए
पुलिस परेशान
दोहों में—
गाँव की चिट्ठी
वासंती दोहे
कविताओं में—
ज़रूरी है
बचकर रहना
बेटियों की
मुस्कान
मैं घर लौटा
मुक्तकों में—
सात
मुक्तक
क्षणिकाओं में—
दस क्षणिकाएँ
गीतों में—
आ भाई सूरज
इस बस्ती में
उजियारे के जीवन में
उम्र की
चादर की
कहाँ गए
धूप
की चादर
धूप ने
उदास छाँव
आसीस अंजुरी भर
लेटी है माँ
संकलन में—
नई भोर
नया उजाला
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कवि जी पकड़े गए
हत्या के प्रयास में
कवि जी पकड़े गए
अति सुकोमल हाथ उनके
हथकड़ियों में जकड़े गए
आरोप था उन पर यह-
कवि जी पथिक को रोककर
कविता सुन रहे थे
बेहोश जब वह हो जाता
पानी छिड़ककर उसे बार-बार
होश में ला रहे थे।
९ मई २००६
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