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उम्र की चादर की
कहाँ गए
धूप की चादर
धूप ने
उदास छाँव
आसीस अंजुरी भर
लेटी है माँ

संकलन में—
नई भोर
नया उजाला

  ज़रूरी है

जीवन के लिए ज़रूरी है-
थोड़ी-सी छाँव
थोड़ी-सी धूप।
थोड़ा-सा प्यार
थोड़ा-सा रूप।

जीवन के लिए ज़रूरी है-
थोड़ी-तकरार
थोड़ी मनुहार।
थोड़े-से शूल
अंजुरीभर फूल।

जीवन के लिए ज़रूरी है-
दो चार आँसू
थोड़ी मुस्कान।
थोड़ा-सा दर्द
थोड़े-से गान।

जीवन के लिए ज़रूरी है-
उजली-सी भोर
सतरंगी शाम।
हाथों को काम
तन को आराम।

जीवन के लिए ज़रूरी है-
आँगन के पार
खुला हो द्वार।
अनाम पदचाप
तनिक इंतज़ार।

जीवन के लिए ज़रूरी है-
निंदा की धूल
उड़ा रहे मीत।
कभी-कभी हार
कभी-कभी जीत।

१६ फरवरी २००६

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