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अनुभूति में कृष्णानंद कृष्ण की रचनाएँ—

नया गीत—
जाने किसकी नज़र लगी

गीतों में—
गुनगुनाना उनका
चाँद उतर आया है
पूत गया परदेस
बदली कहाँ गाँव की माटी
सर्दियों के दिन
सपनों में जीना
हमारे गाँव में

 

चाँद उतर आया है

पिछवारे पोखर में
चुपके से चाँद उतर आया है।

पोखर जल काँप रहा
थमी पुरवाई है
आँगन की सोनपरी
सहमी सकुचाई है
झुकी-झुकी पलकों ने आपस में
धीरे बतियाया है।

कंचन मृग-सा रूप
तुम्हारा छलता है
मेरे मन में संशय एक
सदा पलता है
मृग-मरीचिका के पीछे मन
बार-बार भरमाया है।

खड़ा द्वार मेरे जो
हरसिंगार हुलसित है
तुलसी के बिरवे का
पोर-पोर पुलकित है
देख रूप को रूप आज फिर
क्यों शरमाया है।

1 दिसंबर 2006

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