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अनुभूति में कवि कुलवंत सिंह की रचनाएँ-

अंजुमन में-
तप कर ग़मों की आग में

हाइकु में-
सत्रह हाइकु

गीतों में
छेड़ो तराने
प्रकृति
भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र
प्रणय का गीत
वंदना

 

वंदना

वर दे। वर दे। वर दे।
शतदल अंक शोभित वर दे।

मधुर मनोहर वीणा लहरी
राग स्रोत की छटा है छहरी
कण-कण आभा अरुण सुनहरी
तान हृदय मे परिमित गहरी।
उर मे मेरे करुण भाव भर दे।
वर दे। वर दे। वर दे।।
शतदल अंक शोभित वर दे।

तरुदल पर किसलय डोले
पीहूँ पीहूँ पपीहा बोले
मलय तरंगित ले हिंडोले
आशीष शारदा मन पट खोले।
काव्य किलोल कर मधुरिम कर दे।
वर दे। वर दे। वर दे।।
शतदल अंक शोभित वर दे।

द्विज विस्मित कलरव विस्मृत
सुरभि मंजरी दिगंत विस्तृत
नाचे मयूर झूमे प्रकृति
अंब वागेश्वरी संगीत निनादित।
गीतों मे मेरे रस छंद ताल भर दे।
वर दे। वर दे। वर दे।।
शतदल अंक शोभित वर दे।

16 मार्च 2007

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