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अनुभूति में कुमार रवींद्र` की रचनाएं

नए गीत
गीत तुम्हारा
ज़रा सुनो तो
मेघ सेज पर
वानप्रस्थी ये हवाएँ
शपथ तुम्हारी
हाँ सुकन्या

गीतों में
बहुत पहले
संतूर बजा
सुनो सागर
हम नए हैं

 

हम नए हैं

हम नए हैं
नए थे भी
नए आगे भी रहेंगे

यह हमारा गीत होना
सुनो समयातीत होना है
बन सदाशिव
ज़हर से अमृत बिलोना है
कल दहे थे
दह रहे हैं
कंठ आगे भी दहेंगे

सूर्य के संग यात्रा में
आज या कल नहीं होता
गीत का क्षण है अजन्मा
वह कभी भी नहीं खोता
बह रहे थे
कल बहे थे
जल हमेशा ही बहेंगे

सत्य वह है
जो रहा सुंदर हमेशा
वह नहीं जिसके सदा ही
बीतने का अंदेशा
कल कहा था
कह रहे हैं
यही कल भी हम कहेंगे।

1 मई 2007

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