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कुछ क़तए
कुछ रुबाइयाँ
कौन करता याद
कौन देता है कौन पाता है
जहाँ उम्मीद हो ना मरहम की

जिस पे तेरी नज़र
झूठ को सच बनाइए साहब
तेरे आने की ख़बर
दिल का दरवाज़ा
दिल का मेरे
दिल के रिश्ते
नीम के फूल
फूल ही फूल

फूल उनके हाथ में जँचते नही
मिलने का भरोसा
याद आए तो
याद की बरसातों में
याद भी आते क्यों हो
ये राह मुहब्बत की
लोग हसरत से हाथ मलते हैं

`

याद आए तो

ज़िक्र तक हट गया फ़साने से
लोग जब हो गए पुराने से

बात सुनते नहीं बुज़ुर्गों की
हैं ख़फ़ा उनके बुदबुबाने से

जो है दिल में जुबाँ पे ले आओ
दर्द बढ़ता बहुत दबाने से

तू मिला आँख यार क़ातिल से
ना पसीजेगा गिड़गिड़ाने से

याद आए तो जागना बेहतर
मीच कर आँख छटपटाने से

राज बस एक ही खुशी का है
चाहा कुछ भी नहीं जमाने से

ग़म के तारे नज़र नहीं आते
चाँद के सिर्फ़ मुसकुराने से

देख बदलेगी ना कभी दुनिया
तेरे दिन रात बड़बड़ाने से

बुझ ही जाना बहुत सही यारों
बे सबब यों ही टिमटिमाने से

तुम बुरे को बुरा कहो नीरज
यही अच्छा है फुसफुसाने से

24 जुलाई 2007

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