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बयान

मैंने अपने ईश्वर को
धीमा ज़हर देकर
धीरे-धीरे मारा है
हो यह भी सकता था
एक धारदार चाकू
हवा में लहराता
और गूँजती एक चीख
देर तक वातावरण में
लेकिन ऐसा हो न सका
मैं उसे इस तरह मारता
तो भला कैसे?
मैंने जब-जब ऐसा करना चाहा
मेरी माँ पूजा घर में बैठी थी
उसी ईश्वर के समक्ष
नतमस्तक।

२५ फ़रवरी २००८

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