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अनुभूति में प्रवीण चंद्र शर्मा की रचनाएँ

कविताओं में
झील के ठहरे जल से
थोड़ी देर
न ययौ न तस्थौ
प्रार्थना
शेषयात्रा
स्पंदन
हत्या का रहस्

 

 

प्रार्थना

ढूँढना तो पड़ी
लेकिन, एक दिन
दिख गई मुझको
मेरी प्रार्थना

बादलों की ओट में छिपी
धुंध के कुहासे में लिपटी
दृष्टि पथ से ओझल थी
मेरी प्रार्थना

सहसा- अकस्मात नहीं
एक दिन- अचानक नहीं
एक लंबे समय तक
मेरे साथ-साथ चली
मेरी प्रार्थना

जैसे वृक्षों में, पहले
पत्ते आते हैं
फिर फल
धीरे-धीरे पक कर
बड़ी हुई
मेरी प्रार्थना

दिख तो गई थी
एक दिन, लेकिन
क्या सचमुच
मिल गई, मुझको
मेरी प्रार्थना?

16 जनवरी 2007

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।