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अनुभूति में राजर्षि अरुण की रचनाएँ

जानना चाहता हूँ
तुम भी क्या करो
तुम्हारे जाने के बाद
नारी पत्ती जैसी होती होगी
मेरा कनकौआ
सपने में और बाहर तुम
समय की पीड़ा

 

तुम भी क्या करो

मुझे देखकर अब
यदि नहीं आते
तुम्हारी आँखों में आँसू
तो ऐसा नहीं है कि तुम
रोना भूल गई हो या कि
रोते-रोते सूख गए हैं तुम्हारे आँसू
बल्कि यही कि
शहर को ही हो गया है
डिहाइड्रेशन!

16 मार्च 2007

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