अंजुमनउपहार कविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम
गौरवग्रंथ दोहेरचनाएँ भेजेंनई हवा पाठकनामा पुराने अंकसंकलन
हाइकु हास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतरसमस्यापूर्ति

 


अनुभूति में संदेश त्यागी की रचनाएँ-

नई रचनाएँ-
कागज़ पर
चिराग
जिसमें एक दास्तान है यारो
परिवर्तन
सीमा
हमको ऐसी सज़ा दीजिए
क्षितिज

गीतों में-
कुछ कदम हम चलें
घोर यह अँधेरा है
ये सब कुदरत की बातें हैं

व्यंग्य में-
आधुनिक गीता

अंजुमन में-
उनमें वादों को निभाने का हुनर होता है
उसका नहीं है हमसे सरोकार दोस्तों
ये कहाँ ज़िंदगी भी ठहरी है

  आधुनिक गीता
आधुनिक अर्जुन-

 सर, मुझे उसने किया आफर,
तू मेरा काम ऐसे कर,
मैं मालामाल कर दूँगा,
ये चेहरा लाल कर दूँगा।
मगर ये बेईमानी है,
भला इज़्ज़त गँवानी है?

आधुनिक कृष्ण- व्यर्थ की बात करते हो
व्यर्थ में तुम तो डरते हो
अमर अब बेईमानी है
और स्टेटस की निशानी है।
आधुनिक अर्जुन- मगर पकड़ा तो जाऊँगा
मैं कैसे मुँह दिखाऊँगा
ज़माना मुझको कोसेगा
मैं ज़िंदा रह न पाऊँगा
आधुनिक कृष्ण- अनाड़ी तुम पुराने हो
न इतना भेद जाने हो
समझ थोड़ी नहीं बाकी
भ्रष्ट वर्दी भी है खाकी
अगर पकड़े भी जाओगे
तुरंत ही लौट आओगे।
आधुनिक अर्जुन- मगर ये पाप न होगा?
आधुनिक कृष्ण- खाली हाथ थे तुम
जब कदम रखे थे धरती पर
खाली ही रहोगे क्या
तुम अपने वक्ते रुख़सत पर
धर्म तो ये नहीं कहता
चदरिया ज्यों की त्यों धर दो
अरे जब जन्म पाया है
तो थोड़े काम भी कर दो
यही कर्तव्य तेरा है
अभी छाया अँधेरा है
बात को फ़ील तू कर ले
शीघ्र ही डील तू कर ले।
आधुनिक अर्जुन- मगर इज़्ज़त का क्या होगा?
आधुनिक कृष्ण- इज़्ज़त कट नहीं सकती है
इज़्ज़त बिंध नहीं सकती
न गीली हो ही पाएगी
न आग उसको जलाएगी
आधुनिक कृष्ण- भगवन, ज्ञान की तुमने भारी बरसात कर दी
मुझसे मेरी मुलाक़ात कर दी
बताए भक्त को प्रसाद अब कैसे चढ़ाना है?
आधुनिक कृष्ण- कृष्ण मिलेगा जितना तुझको
उसका फिफ्टी घर पे लाना है।

अब अफ़सर भी कमाता है, मातहत भी कमाता है
बिना खर्चे किसी फ़ाइल पे वो न पेन चलाता है
मगर हालत ये है कि अब पुराने कृष्ण अर्जुन को
देखकर नया गीता ज्ञान बस रोना ही आता है।

9 जून 2006

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँ दिशांतरसमस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।