अंजुमनउपहार कविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम
गौरवग्रंथ दोहेरचनाएँ भेजेंनई हवा पाठकनामा पुराने अंकसंकलन
हाइकु हास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतरसमस्यापूर्ति

 


अनुभूति में संदेश त्यागी की रचनाएँ-

नई रचनाएँ-
काग़ज़ पर
चिराग
जिसमें एक दास्तान है यारो
परिवर्तन
सीमा
हमको ऐसी सज़ा दीजिए
क्षितिज

गीतों में-
कुछ कदम हम चलें
घोर यह अँधेरा है
ये सब कुदरत की बातें हैं

व्यंग्य में-
आधुनिक गीता

अंजुमन में-
उनमें वादों को निभाने का हुनर होता है
उसका नहीं है हमसे सरोकार दोस्तों
ये कहाँ ज़िंदगी भी ठहरी है

 

कुछ कदम हम चलें

कुछ कदम हम चलें कुछ कदम तुम चलो
बीच की सारी दीवारें गिर जाएँगी
फिर मेरी आँख में झाँक कर देखना
तुमको अपनी ही सूरत नज़र आएगी
कुछ कदम हम चलें कुछ कदम तुम चलो।

फूल खिलते यहाँ फूल खिलते वहाँ
पर सुगंध उनकी जाने गई है कहाँ
हम हवा का अगर झोंका बन के बहें
खुशबू फिर से चमन में बिखर जाएगी
कुछ कदम हम चलें कुछ कदम तुम चलो।

हाल जैसे इधर हाल वैसे उधर
मौत आती नहीं ज़िंदगी दर बदर
मैं तलाशूँ तेरी तू तलाशे मेरी
ज़िंदगी हमसे बचकर किधर जाएगी
कुछ कदम हम चलें कुछ कदम तुम चलो।

गीत गर प्यार के गुनगुनाते रहें
वक्त तकरार के हम भुलाते रहें
सरहदें ख़त्म हों अम्न की रस्म हो
अपनी तकदीर 'त्यागी' सँवर जाएगी
कुछ कदम हम चलें कुछ कदम तुम चलो।

9 जून 2006

 

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँ दिशांतरसमस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।