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संस्कृत हाइकु

  साधारण इंसान

मुझको नहीं बनाना दानव और न ही भगवान
मुझे बने रहने दो केवल साधारण इंसान

हो जाए कुछ भूल राई का नहीं पहाड़ बनाना
समझ सकूँ जो स्वयं प्यार से कुछ ऐसे समझाना
इतनी भी नफ़रत मत करना बन जाऊँ हैवान
मुझे बने रहने दो केवल साधारण इंसान

पाऊँ कला कुछ तुम खजूर पर इतना नहीं चढ़ाना
भूल जाऊँ अपनी ज़मीन और सीख जाऊँ इतराना
इतनी नहीं प्रशंसा करना आ जाए अभिमान
मुझे बने रहने दो केवल साधारण इंसान

पा जाऊँ कुछ ज्ञान नहीं पूजा की भंग पिलाना
खुद को खुदा समझने के दुष्भ्रम से मुझे बचाना
माला ले पीछे मत पड़ना मत करना सम्मान
मुझे बने रहने दो केवल साधारण इंसान

अच्छा लगूँ तो कुछ मत करना अच्छाई ले लेना
बुरा लगूँ तो अपनेपन से मुझे माफ़ कर देना
इतनी भी नफ़रत मत करना बन जाऊँ हैवान
मुझे बने रहने दो केवल साधारण इंसान

जो भी हूँ जैसा भी हूँ तुम दर्पण-सा दिखलाना
समझ सकूँ जिस तरह प्यार से कुछ ऐसा समझाना
जैसी की तैसी चादर रख जाऊँ हे भगवान!
मुझे बने रहने दो केवल साधारण इंसान

1 अगस्त 2006

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