अंजुमनउपहारकाव्य संगमगीतगौरव ग्रामगौरवग्रंथ दोहेरचनाएँ भेजें
पुराने अंकसंकलनहाइकु हास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतर

अनुभूति में श्यामल सुमन की रचनाएँ -

नई रचनाएँ-
बच्चे से बस्ता है भारी
मुझको वर दे तू
रोग समझकर
साथी सुख में बन जाते सब

अंजुमन में-
बाँटी हो जिसने तीरगी
मुस्कुरा के हाल कहता
मेरी यही इबादत है
रोकर मैंने हँसना सीखा
हाल पूछा आपने
 

कविताओं में-
आत्मबोध
इंसानियत
एहसास
कसक
ज़िंदगी
द्वंद्व
दर्पण
फ़ितरत 
संवाद
सारांश
सिफ़र का सफ़र

दोहों में-
दोहों में व्यंग्य
नेता पुराण

 

एहसास

मेरे मालिक तू बता दे क्यों बना ऐसा जहाँ।
सच को लाओ सामने तो दुश्मनी होती यहाँ।।

ख़्वाब बचपन में जो देखा वो अधूरा रह गया।
अनवरत जीने की ख़ातिर दे रहा हूँ इम्तहां।।

मुतमइन कैसे रहूँ जब घर पड़ोसी का जले।
है फरिश्ता दूर में अब आदमी मिलता कहाँ।।

हर कोई बेताब अपनी बात कहने के लिए।
सोच की धरती अलग पर सब दिखाता आसमाँ।।

ग़म नहीं इस बात का कि लोग भटके राह में।
हो अगर एहसास ज़िंदा छोड़ जाएगा निशां।।

मुश्किलों से भागने की अपनी फ़ितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमा।।

मिलती है खुशबू सुमन को रोज़ अब खैरात में।
जो फ़क़ीरी में लुटाते अब यहाँ फिर कल वहाँ।।

16 मई 2006

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँ दिशांतरसमस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है