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अनुभूति में सुनीता ठाकुर की रचनाएँ

औरत के क्षितिज से
अपने हक़ के लिए
ठहरा हुआ पानी
धरती की कोख में
प्रयास

 

अपने हक़ के लिए

अपने हक़ के लिए
लड़ती,
रौंदती-हक़ उम्र के।
उम्र थी-
सवालों से घिरी
अपने लिए
सुकून के दो पल तलाशती
उम्र की ढलान पर
बेतहाशा दौड़ती ज़िंदगी
को संभालती
सहारा ढूँढ़ती-सहारा बनती।

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।