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अनुभूति में सुनीता ठाकुर की रचनाएँ

औरत के क्षितिज से
अपने हक़ के लिए
ठहरा हुआ पानी
धरती की कोख में
प्रयास

 

ठहरा हुआ पानी

ठहरा हुआ पानी
मैं और तुम
फ़ुरसत के दो पल
और आइसक्रीम के साथ
साँस दर साँस
सुलगते।
पिघलते जज़्बात
एक मौन
या कि
थिरकता हुआ रोमांस
ज़िंदगी को
और क्या चाहिए।

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।