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विजय कुमार श्रीवास्तव 'विकल'

जन्म तिथि : 8 जुलाई 1936 गया, बिहार में।

शिक्षा : इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक।

कार्यक्षेत्र : सन सत्तर के दशक में छाया वादी चतुष्पदी के साथ संपूर्ण प्रयाग में साहित्य की अलख जगाते रहे। उस दौर में मनवता की द्रौपदी और रात की दुह्लन रचनायें विशेष रूप से साहित्य जगत में चर्चित रहीं तथा अपने कार्यालयी साथी व प्रसिद्ध साहित्यकार कैलाश कल्पित के साथ मिल कर हिंदी की स्थापना के लिए निरंतर संघर्ष रत रहे। सुमित्रा नंदन पंत, महादेवी वर्मा, डा. रामकुमार वर्मा द्वारा हृदय खोल कर प्रशंसित।
अपने काव्य कर्म के लिए हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग द्वारा सरस्वती अभ्यर्थना अलंकरण से अलंकृत।

संप्रति : सन 1994 में रेलवे में सीनियर सेक्शन अफ़सर के पद से रिटायर हो कर इलाहाबाद में स्वाध्याय मनन चिंतन।

ई मेल: mmsrivastavas@indiatimes.com

  अभिव्यक्ति में विजय कुमार श्रीवास्तव 'विकल' की रचनाएँ

जीवन की साध
परिवर्तन
मधुहीन आज यौवन प्याला
मानवता की द्रौपदी
मुझे दिन में भी अंधेरा दीखता है
रात की दुल्हन
सात क्षणिकाएँ
हृदय वीणा को न जाने कौन झंकृत कर रहा है

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