अंजुमनउपहार कविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम
गौरवग्रंथ दोहेरचनाएँ भेजेंनई हवा पाठकनामा पुराने अंकसंकलन
हाइकु हास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतरसमस्यापूर्ति

 


अनुभूति में विपिन चौधरी की
रचनाएँ-

नई रचनाओं में-
एक उदास शाम
ग़ायब होती एक तस्वीर
जन्मदिवस

प्रार्थना का वक्त
परछाइयों के पीछे-पीछे
सपनों के बीच वह

सुलझी हुई पहेली

कविताओं में-
आवाज़ों का कोलाहल
एक बार फिर
कितने रंग
पत्थर होती दुनिया
मेरा सरोकार मेरा संवाद
मेरा होना न होना
समर्पण

 

एक उदास शाम

जितनी उदास एक शाम हो सकती है
उतनी ही उदास शाम है यह।
अवसाद बेहद कठोर हो
जम गया है
आज इस सर्द शाम के
ईद गिर्द।

कहीं से उसके बह सकने के आसार
नज़र नहीं आते।
तो क्या ये पूरी दुनिया
यों ही जमी रहेगी
आज की तारीख की
इस शाम।

इस वीरान शाम
उदासी की धुन
लगभग उसी तरह
महसूस की जा सकती है
जितनी कि
एक चिथड़ा सुख के शब्दों के बीच से बहती
खामोश उदासी
या मेहँदी हसन की ग़ज़लों
के दर्द को आत्मसात
करते हुए महसूस होती है।
सामने की यह दीवार,
फूलदान के सभी सफ़ेद फूल,
नटराज की मूर्ति
ठहरी हुई है वहीं की वहीं
उस उदास शाम के चलते
कोई भी चीज़
प्रतिध्वनित हो कर
मेरे सामने नहीं आती
चली जाती है सीधी की सीधी एक ही रेखा में
कभी लौट कर न आने के लिए।

1 सितंबर 2007

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँ दिशांतरसमस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।