अंजुमनउपहार कविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम
गौरवग्रंथ दोहेरचनाएँ भेजेंनई हवा पाठकनामा पुराने अंकसंकलन
हाइकु हास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतरसमस्यापूर्ति

 


अनुभूति में विपिन शून्य की रचनाएँ

नई रचनाएँ
दर्द निवारक हो जाएँ
सिमटते जज़्बात
लालटेन
सफ़ेद होली
प्यार का अर्थ

कविताओं में
उम्र का पड़ाव
करवट
बाज़ार
मैं ईराक हूँ
वो जूता

 

प्यार का अर्थ

वो प्यार नहीं था
जो मैंने तुम से किया था।
सारा-सारा दिन
इंतज़ार किया करता था मैं
बस तुम्हारे रास्तों को
तकना ही जैसे
मेरी दिनचर्या हो गई थी।
वोह भी तो प्यार कहाँ था
जब तुम्हारे
बस एक फ़ोन की
आवाज़ मुझे सुकून दे जाती थी।
वह भी प्यार नहीं था
की तुम्हारे पत्रों को
अपने सीने से लगाता था।
नहीं प्रिये!!
इन सब को मैं
प्यार की संज्ञा नहीं दे सकता।
वोह प्यार नहीं
जो मैं किया करता था।
प्यार तो बस
तुमने ही किया था मुझसे,
तुमने कभी इंतज़ार नहीं किया मेरा
क्योंकि तुम चली आया करती थी
मुझसे मिलने।
फ़ोन सदा तुमने ही किया,
पत्र भी तुम ही तो
भेजा करती थी मुझे।
प्यार में ख़ुद को
समर्पित कर दिया था तुमने।
आज तुम नहीं हो
मगर!
मैं ज़िंदा हूँ
प्यार का अर्थ जान ने के लिए

9 सितंबर 2007

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँ दिशांतरसमस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।