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आमचुनाव में
क्योंजी आप कहाँ चूके?
खूब विचार किए
नाम लिखा दाने दाने पर
बेपेंदी के लोटे
मुस्कान ये अच्छी नहीं
ये उत्सव के फूल
हम चुनाव में हार गए

  आम चुनाव में

ये हारा वो जीता आमचुनाव में
अपना हुआ फ़जीता आमचुनाव में

गीदड़ निकला मतगड़ना के बाद वो
जो बनता था चीता आमचुनाव में

रामराज्य के धोबी जैसी फब्तियाँ
खड़ी हुई जब सीता आमचुनाव में

मानव देह धरे गिरगिट अवतार जो
उसको बड़ा सुभीता आमचुनाव में

चंदा दे दे गंजी हो गई चांद भी
खाली हुआ खलीता आमचुनाव में

वर्कर पानी पी पी करके कोसता
जो दारू था पीता आमचुनाव में

कागज़ कलम उठा दफ़्तर में बैठ फिर
जो बीता सो बीता आमचुनाव में

16 मई 2007

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