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हास्य व्यंग्य में-
आमचुनाव में
क्योंजी आप कहाँ चूके?
खूब विचार किए
नाम लिखा दाने दाने पर
बेपेंदी के लोटे
मुस्कान ये अच्छी नहीं
ये उत्सव के फूल
हम चुनाव में हार गए

 

हम चुनाव में हार गए

ज्योतिषियों के सब भविष्यफल बिल्कुल ही बेकार गए
बाबा तेरी आशीषें ले हम चुनाव में हार गए

मंत्र पढ़े थे पूजा की थी अनुष्ठान करवाए थे
जाने कितने ओझाओं के झाड़ू भी तो खाए थे
कई पुरोहित हवन यज्ञ के पैसे ले हरिद्वार गए
बाबा तेरी आशीषें ले हम चुनाव में हार गए

माथे ऊपर रंग लगाया दाढ़ी नहीं बनाई थी
कई मज़ारों पर रेशम की चादर भी चढवाई थी,
गुरुद्वारों में शीश झुकाने लेकर घर परिवार गए
बाबा तेरी आशीषें ले हम चुनाव में हार गए

जहाँ धर्म की दूकानें थीं भीड़ जहाँ पर जाती थी
मैंने वहाँ वहाँ पर अपनी आमद दर्ज़ करा दी थी
रोटी रोज़गार के चक्कर सब धर्मों को मार गए
बाबा तेरी आशीषें ले हम चुनाव में हार गए

मेरा और तुम्हारा भी ये कितना फर्ज़ फजीता है
जो तुमको ठेंगा दिखलाता वो चुनाव में जीता है
पास हमारे आते थे जो सब उसके दरबार गए
बाबा तेरी आशीषें ले हम चुनाव में हार गए

16 मई 2007

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