अंजुमनउपहार कविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम
गौरवग्रंथ दोहेरचनाएँ भेजेंनई हवा पाठकनामा पुराने अंकसंकलन
हाइकु हास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतरसमस्यापूर्ति

 


अनुभूति में यदु जोशी 'गढ़देशी' की
रचनाएँ-

कविताओं में-
गति
दोगले चेहरे
नकली है
पहाड़ और मैं
रस्सियाँ
स्वेटर
समय

 

नकली है

पेट को चाहिए रोटी, मगर नोट नकली है
नज़र का फ़र्क है या हर चीज़ नकली है।

जीना चाहता हूँ ज़िंदगी मैं तेरे वास्ते
क्या करुँ हर दवा नकली नकली है।

चाक कर दूँ जिगर, मिटा दूँ हस्ती मेरी
हर चेहरा यहाँ का, लगता नकली है।

किसे लगाऊँ गले, किसके आँसू पोछूँ
जो भी बहता है, नकली-नकली है।

किससे इश्क करूँ, किसे अपना समझूँ
दोस्त कहता हूं जिसे वह भी नकली है।

कैसे करुँ इबादत, कैसे करुँ सिजदे,
ज़र्रा-ज़र्रा यहां पर नकली नकली है।

देना चाहा था तुम्हें सौगात प्यार की,
मोती जो लगा हाथ, वह भी नकली है।

ऐ प्यासी धरती, दरख़्तों, नाचते मोरों,
बादल जो घिरा आज, वह भी नकली है।

24 सितंबर 2007

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँ दिशांतरसमस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।