अंजुमनउपहार कविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम
गौरवग्रंथ दोहेरचनाएँ भेजेंनई हवा पाठकनामा पुराने अंकसंकलन
हाइकु हास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतरसमस्यापूर्ति

 


अनुभूति में यदु जोशी 'गढ़देशी' की
रचनाएँ-

कविताओं में-
गति
दोगले चेहरे
नकली है
पहाड़ और मैं
रस्सियाँ
स्वेटर
समय

 

रस्सियाँ

आम आदमी के लिए
रस्सियाँ बड़े काम की होती हैं
छप्पर बाँधने के लिए
रस्सियाँ
बैलों को खेत-खलिहानों तक
हाँकने के लिए
रस्सियाँ
पीठ पर बोझ को
लादने के लिए
रस्सियाँ
थककर चूर हो
खटिया में झपकियाँ लेने के लिए
मूँज की रस्सियाँ
बाढ़ के दुरागमन पर
बचे-खुचे सामानों को
बाँधने के लिए
रस्सियाँ
और अकाल पड़ने पर
गले में फंदा डालकर
लटक जाने के लिए
रस्सियाँ ही काम आती हैं।

24 सितंबर 2007

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँ दिशांतरसमस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।