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अनुभूति में यदु जोशी 'गढ़देशी' की
रचनाएँ-

कविताओं में-
गति
दोगले चेहरे
नकली है
पहाड़ और मैं
रस्सियाँ
स्वेटर
समय

 

समय

बेटा बड़ा हो गया है
मेरी तरह लंबा चौड़ा
उसके मेरे कपड़े
अकसर अदल बदल जाते हैं
कहते हैं जब बाप का जूता
बेटे के पैरों में आ जाए
बेटा दोस्त हो जाता है
अब वह मेरी जमा पूँजी की
अच्छी समझ रखता है
बन-ठन कर रहता है
कीमती मोबाइल, चश्मा
फिर बाइक ख़रीदवाता है
और सड़कों पर दिखाता है मर्दानगी
दनदनाता हुआ
भीड़ को चीरफाड़
निकल जाता है
किन्तु जब कभी मैं
वाहन चलाता होता हूँ
वह समझता है
मैं अभी नौसिखिया हूँ
ठीक ही कहते हैं लोग
कि अब समय बदल गया है
अभी जो रफ्तार है
कल और बढ़ेगी
क्योंकि समय बदल रहा है
और अभी से मैं बूढ़ा
मेरी सोच बुढ़ा रही है
क्योंकि आज भी मैं
रफ्तार की इस दुनिया में
अतीत का मुसाफ़िर हूँ!

24 सितंबर 2007

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