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अनुभूति में यश छाबड़ा की रचनाएँ

कविताओं में-
आईना
कल्पना
गाँव का कुआँ
फव्वारे का संदेश
बचपन का साथी
बारिश थमने के बाद
वो पुराना घर
हे प्रभु

 

आईना

शेव बनाते हुए मेरी नज़र
अक्सर मूछों पर अटक जाती है
परेशान हो जाता हूँ
बढ़ते हुए सफ़ेद बालों को देख कर
ढलती उम्र का अहसास होता है
ऐसे में मेरा अक्स मुझसे पूछता है
इन बीते सालों में तुमने
समाज को क्या दिया
क्या किसी के आँसू पोछे
क्या किसी भूखे को खाना खिलाया
क्या किसी को तन ढकने को कपड़ा दिया
इन सवालो से मैं
और भी परेशान हो जाता हूँ
और ब्रश तेज़ी से चलाने लगता हूँ

24 मई 2007

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।