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अनुभूति में यश छाबड़ा की रचनाएँ

कविताओं में-
आईना
कल्पना
गाँव का कुआँ
फव्वारे का संदेश
बचपन का साथी
बारिश थमने के बाद
वो पुराना घर
हे प्रभु

 

बचपन का साथी

बचपन की यादों का सफ़र
अक्सर उस रेत के टिब्बे
पे जाकर रुकता है
जहाँ कभी हम,
छोटे-छोटे घरौंदे बनाते थे
मेरा घरौंदा अक्सर
उसके घरौंदे से
कम सुंदर बनता
मुझे मायूस देख वो
अपना घरौंदा तोड़ देती
मेरी मायूसी और बढ़ जाती
तो वह मेरा घरौंदा भी
गिरा देती व कहती,
"क्यों न हम एक घरौंदा
ही बनाए"
फिर वो मुस्कुरा कर
अपना नन्हा पाँव
मेरे पाँव से जोड़ देती
फिर जो घरौंदा बनता
उसे देख मै खिल उठता!

24 मई 2007

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