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अनुभूति में यश छाबड़ा की रचनाएँ

कविताओं में-
आईना
कल्पना
गाँव का कुआँ
फव्वारे का संदेश
बचपन का साथी
बारिश थमने के बाद
वो पुराना घर
हे प्रभु

 

कल्पना

कल्पना ईश्वर की दी हुई
एक अद्भुत शक्ति है
जिससे एक अंधा
दुनिया की खूबसूरती देख सकता है
गूंगा मधुर गीत गा सकता है
बहरा सरगम के सुर सुन सकता है
घर बैठा इंसान दुनिया की सैर कर सकता है
कल्पना ले जाती है हमें सागर की गहराई में
कभी ऊँचे आसमान में
कभी पहाड़ों में, कभी घाटियों में
कभी झील तो कभी नदी के किनारे
यह प्रेरित करती है
कवि को कविताएँ लिखने के लिए
चित्रकार को चित्र बनाने के लिए
मूर्तिकार को मूर्ति बनाने के लिए
संगीतकार कोई नई धुन बनाने के लिए
इसका हाथ थामे हम चाँद पे
पहुँच गए तो क्या हम
उस तक नही पहुँच सकते
जिसने हमें यह शक्ति दी है

24 मई 2007

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।