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नई हवा

उदीयमान रचनाकारों के स्तंभ में इस बार प्रस्तुत है भारत से कुमार लव की रचनाएँ

कुमार लव

जन्म 1986, उत्तर प्रदेश
प्रारंभिक शिक्षा पुंछ, ऊधमपुर और चेन्नै में
उच्च शिक्षा हैदराबाद में बीटेक (इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्प्यूटर इंजीनियरिंग)
कार्य- इनफोसिस

संपर्क- kummarluv@gmailcom

 

  कुमार लय की तीन कविताएँ

1-नया सवेरा

खड़ी इस पुल पर
देखती हूँ
नदी को बहते,
दूर मुझसे
ले जाते हुए
वह सब
जो मेरा था

डूबते सूरज से
सुनहरी हो गई नदी,
एक पल को
उलट गया बहाव,
और आ गए तुम

रात हो गई अचानक

2 क्रांति?
सुबह का समय
अनिश्चितता से भरा,
सोने से पहले जैसा था
सब वैसा न रहा तो?

किसी कुस्वप्न से जागते हुए
खिड़की से बाहर देखा,
पीले फूलों से लदा पेड़
धुंध से ढँका था,
दिख नहीं रहा था

उठता हुआ
अनमना सा
सोचने लगा,
कब आज़ाद हो पाएँगे
पुरखों के पाप से?
क्या हो पाएँगे?

क्या तुम जानते हो
हम सब भी चाहते है बदलाव?
पर बिना कबूतरों को
जलते घर से
दूर भगाए
हमारा योगदान?
वह सब जो संभव है
पर अगर चंदा चाहिए
तो आगे बढ़ जाओ



3 बुरा जो देखन मैं चला

तुम्हें घेरे खड़े लोग
तुम्हारी कही हर बात को
सही कहते हैं, मानते हैं

पर मुझे तुम
इंसान नहीं, कोई मशीन लगते हो,
तुम्हारे होंठों से शब्द तो झर रहे हैं
पर तुम बात नहीं कर रहे,
कर रहे हो जुगाली

ये वही लोग है
जिन्हें दिखती है दिव्य ज्योति
क्योंकि ये हैं दिव्य,
जिन्हें दिखते हैं राजा के कपड़े
क्योंकि ये हैं निष्पाप,
जिन्हें नहीं दिखता कुछ भी बुरा

24 जून 2007

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