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लाठी बाँस बुजुर्ग की
 

पीपल जैसा पूत है, वैसा ही है बाँस
प्राण-वायु का स्रोत है, मिले चैन से साँस

पलना नव शिशु को मिले, या सोने को खाट
गर्मी में पंखा झलें, अजब बाँस के ठाट

बँहगी काँधे पर धरे, बोझ उठायें लोग
शिव अर्चन काँवड़ करें, बाँस वृक्ष संयोग

घर-फर्नीचर, कुर्सियाँ, सजावटी सामान
कागज-औषधियाँ मिलें, इसके बहु आयाम

सुख-समृद्धि का मूल है, करे निवारण दोष
'फेंगशुई' माने इसे, पौध दिव्य संतोष

हरित स्वर्ण कहते इसे, मानव का है मित्र
आजीवन सहयोग दे, यही विशिष्ट चरित्र

डलिया, टोपी, टोकरी, बने थाल औ सूप
काज सभी के हित करे, क्या निर्धन क्या भूप

वाद्य यंत्र इसके बने, कृष्ण बाँसुरी प्रीत
सम्मोहित राधा हुई, विकल प्रेम की रीत

भोज्य वस्तु इससे बने, अति स्वादिष्ट अचार
वैज्ञानिक कहते यहाँ, सम्भावना अपार

लाठी-बाँस बुजुर्ग की, सदा निभाए साथ
भय दायक बनती वही, दिखे पुलिस के हाथ

ऊँचे भवन बने यहाँ, या पूजा पंडाल
शादी मंडप भी सजें, बाँस बिना क्या हाल?

शिक्षा के हर क्षेत्र में, बाँस बने आधार
पुस्तक, लेखन कार्य में, कागज़ से हो प्यार.

सीढ़ी बनके राह दे, ऊँचाई की ओर
अंतकाल भी साथ हो, पहुँच चिता के छोर

अनुपम देन मिली हमें, जीवन बनता भव्य
बाँसों का झुरमुट सदा, रखें हरित कर्तव्य

- ज्योतिर्मयी पंत
२५ मई २०१५

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