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बाँसों का झुरमुट घना
 

बाँसों का झुरमुट घना, छन-छन बहे बयार
मधुवन में कान्हा हँसें, मुरली से अति प्यार

बंसी बनती बाँस से, गाती मीठे गीत
काम छोड़ सखि दौड़ती, वर्षा गर्मी शीत

बाँसों झंडे शोभते, मैया जी के द्वार
धरम पताका देखने, खोलो नयन किवार

लाठी बनती बाँस से, करती है भय दूर
सबक सीखने के लिए, ताकत से भरपूर

हवा तेज जब भी चले, झुक-झुक जाता बाँस
झुकना सब को प्रिय लगे, रहे न मन में फाँस

जीवन यात्रा से थका, सोया आँखें मूँद
बाँस-बिछौने पर चला, मिलने को इक बूँद

कुटिया रघुबर की बनी, टाटी बनती बाँस
लक्ष्मण प्रहरी बन गए, पहरा देते खाँस

बाँसों के झूरमुठ घने, चिड़ियाँ पातीं छाँव
रैन बसेरों के लिए, सुंदर है यह ठाँव

- कल्पना मिश्रा वाजपेयी
२५ मई २०१५

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