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हाइकु
(विभिन्न रचनाकार)
 

पुरवा डोली
कराह उठे बाँस
बँसवारी में

- कमलेश भट्ट कमल
०००

है हरा सोना
संरक्षण जरूरी
बंसवाटियाँ

- निशा कोठारी
०००

बाँसों को लड़ा
हवा, हो गई हवा
झुलसा वन

- आदित्य प्रताप सिंह
०००

सुबह रोज़
फूलों से भरती हूँ
बाँस टोकरी

बाँस वास है
तमाम गौरेयों का
कई साँपों का

- उनिता सच्चिदानन्द
०००

बाँसों के वन
मनचली हवा ने
बजाई सीटी

- डा० सुधा गुप्ता
०००

हारी आँधिया
उखाड़ नहीं सकी
विनम्र बांस

झुकते बाँस
तूफानी आंधियों से
बचते बाँस

-राजीव गोयल
०००

जूझ लेता है
लचकर भी बाँस
काली आँधी से

जगाता रोज़
बाँस भर सूरज
चढ़ता हुआ

प्रीत न करें
तितली-भँवरों से
बाँस के फूल

- अश्विनी कुमार विष्णु
०००

रखते बाँस
अनुभव पोटली
लगा के गाँठ

खोजे पवन
मधुर सरगम
बाँस के वन

- सुनीता अग्रवाल
०००

बॉस का पेड़
खेलता हवाओं से
निकाल आग

- मुकेश भद्रावले
०००

अचारी बने
नन्हा तना बाँस का
स्वादिष्ट लगे

बाँस के फूल
लेके आये सूचना
अंत न दूर

लचीले बाँस
ज्यों कोई सुकुमारी
वनकन्या सी

- आभा खरे
०००

बात यों चुभी
निकालते न बनी
बाँस की फाँस

-पूर्णिमा वर्मन
०००

तेजी से बढ़ें
मेरे हौंसलों जैसे
बाँस एकाग्र

बाँस प्रीत के
तेरे मेरे टकराएँ
अग्नि लगाए

- किरन आचार्य
०००

बाँस बजाता
हवा पर झाँझर
वन सुनता

मन भिगोते
बावरी पुरवा में
बाँस के साज

झूमें बयार
बाँस के घोड़े पर
होके सवार

- डा० सरस्वती माथुर

लम्बा है बाँस
सीढ़ी बन तनता
छूता आकाश

- अरुण आशरी 

धन्य है भाग्य
बंशी ने जीत लिया
कान्हा का प्यार

- रमा द्विवेदी
०००

भिड़ते बाँस
तबाह होता वन
हँसती हवा

-डा० जगदीश व्योम
०००

बांस की तान
वन सुने संगीत
हवा के साथ

- शांति पुरोहित
०००

ज्ञान का पन्थ
बाँस से लिख डाले
तमाम ग्रन्थ

- गुंजन गर्ग अग्रवाल
०००


तेज आँधियां
बांस का मनोबल
तौल हारतीं

- दिनेश चन्द्र पाण्डेय
०००

प्रिय पुकारे
बाँस गाये बिरहा
ताल किनारे

हरित वन
गौरैया धरे डेरा
बाँस बसेरा

आँधी में झुक
बाँस सा बन बड़ा
फिर हो खड़ा

- प्रवीण कुमार श्रीवास्तव
०००

हवा प्रेयसी
पूरे बँसवट में
मचा है द्वंद्व

- राजेन्द्र वर्मा
०००

बाँस वनों में
सुन वंशी, महुआ
है गदराया

- मीरा शलभ
०००

पढ़ते मंत्र
मन्दिर के कोने में
बाँस हो सन्त

- अरुण कुमार सिंह रुहेला
०००

दिखी जो धूप
नाचें, सीटी बजायें
बाँस के पत्ते

- अरुण कुमार सिंह रुहेला
०००

आधुनिकता
प्लास्टिक हुई खास
बाँस उदास

- सुरेश जादव
०००

सोंधी सी गंध
ले आई पुरवाई
बाँस वन से

- शिवजी श्रीवास्तव
०००

आई वातास
चहकी बँसवारी
गा उठे बाँस

- शिवजी श्रीवास्तव
०००

मन में भय
बाँसों पे फूल आते
अकाल लाते

- सन्तोष कुमार सिंह
०००

मंडप तले
वर वधु आशीष
बाँस संजोये

गाये मगन
सघन बाँस वन
झूमे गगन

- ऋता शेखर 'मधु'

०००

सोंधी सी गंध
ले आई पुरवाई
बाँस वन से

- शिवजी श्रीवास्तव
०००

भाग्य में कौन ?
बुढ़ापे का सहारा
बेटा या बाँस

- सन्तोष कुमार सिंह
०००

२५ मई २०१५

 

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