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रास्ते का बरगद
 

 






 

जब भी तुम निकलो मेरे घर के लिए
रास्ते में मिलना
उस क्षत-विक्षत बरगद से भी
पूछना कि उसके लहूलुहान तने को देखकर
मैं 'किस' आधे-अधूरे
टूट कर बिखरे 'रिश्ते' के बारे में सोचती हूँ!

जब भी तुम निकलो अपने घर से
मेरे घर के लिए
तब उससे
मुझे समझने के लिए,
क्योंकि पेड़ कभी झूठ नहीं बोलते!

--फाल्गुनी
६ जून २०११

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