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पुराना ठूँठ बरगद का
 

 






 

पुराना ठूँठ बरगद का पुन: हमने हरा देखा
लगाए जो नये पौधे सभी को अधमरा देखा

सभी दुकान दारों ने जिसे लौटा दिया था कल
जो खोटा था कभी सिक्का उसी को अब खरा देखा

किसे हम दोष दें यारों हमारी ऐसी किस्मत है
गिरी है वहीं पर बिजली जहाँ आसरा देखा

जहाँ इंसाफ अंधा है सभी कानून बहरे हैं
वहाँ गूँगे हैं फरियादी अजब ये माजरा देखा

बहुत उम्मींद लेकर आईने के पास पहुँचे हम
वहाँ अपनी शक्ल का आदमी कोई दूसरा देखा

--सजीवन मयंक
६ जून २०११

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