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बरगद की झूलती जटाएँ
 

 






 

गाँव के किनारे है बरगद का पेड
बरगद की झूलती जटाएँ

कैसी रे झूलती जटाएँ
झूलें बस भूमि तक न आएँ
ऐसे ही लडके इस गाँव के
कहने को पास चले आएँ

बाँहें फैलाएँ झुकते आएँ
मिलने के पहले पर
लौट-लौट जाएँ
बरगद की झूलती जटाएँ

ठाकुर प्रसाद सिंह
६ जून २०११

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