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चंपा के फूल

 

 
तोहफे में जो दिए तुमने कभी चंपा के फूल
आज भी साँसों में बसते हैं वही चंपा के फूल

जिंदगी की वो धरोहर जो बहुत अनमोल है
देख लो सूखे नहीं हैं आज भी चंपा के फूल

हमने तुमने नीव रक्खी थी जहाँ पर प्रेम की
जाते जाते देख लीजे इक घडी चंपा के फूल

पाँव छूने की यही आशा यहाँ तक लायी है
ये समझना देखना जो तुम कभी चंपा के फूल

जब भी देखे यूँ लगा जैसे के बचपन मिल गया
रात रानी, मोगरा, सूरजमुखी, चंपा के फूल

जब कभी आता है सावन याद आते हैं बहुत
धीमी धीमी बूँदा बाँदी और वही चंपा के फूल

आज भी है याद आदिल वो निमंत्रण प्रेम का
नरगिसी आँखें थीं उसकी या कोई चंपा के फूल

-आदिल रशीद
१ जुलाई २०१३

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